छत्तीसगढ़ के रजत महोत्सव के समापन अवसर पर राज्य की प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया गया। यह अवसर इस बार कुछ विशेष रहा, क्योंकि इस वर्ष के समारोह में एक ऐसे पुरस्कार का नाम सामने आया जिसने राज्य की पुलिस परंपरा, नैतिकता और साहस की विरासत को फिर से जीवित कर दिया।

राज्य सरकार की ओर से अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु दिए जाने वाले “पं. लखनलाल मिश्र सम्मान” से इस वर्ष श्री योगेश कुमार साहू को सम्मानित किया गया।
एक ऐतिहासिक क्षण
कार्यक्रम के दौरान मंच पर जब यह घोषणा हुई कि इस पुरस्कार का नामकरण स्वर्गीय पं. लखनलाल मिश्र के नाम पर किया गया है, तो वातावरण भावनाओं से भर गया।

कई वरिष्ठ अधिकारियों और अतिथियों ने इस निर्णय को “न्याय और साहस की परंपरा कासम्मान” बताया।
पं. लखनलाल मिश्र छत्तीसगढ़ की उस पीढ़ी से थे जिसने वर्दी के भीतर विद्रोह की मिसाल पेश की।
ब्रिटिश शासन में पुलिस अधिकारी रहते हुए भी उन्होंने सत्ता की सलामी के बजाय ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया था।
यह कदम, उस दौर में, शासन के विरुद्ध एक खुली चुनौती था — लेकिन यही उनकी पहचान बन गया।
उन्होंने यह साबित किया कि कर्तव्य केवल आदेश पालन नहीं, बल्कि सत्य के प्रति निष्ठा भी है।
एक विरासत से प्रेरित सम्मान
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की पहल पर स्थापित यह सम्मान हर वर्ष उन अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने अपराध अनुसंधान, फॉरेंसिक या साइबर जांच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
इस वर्ष सम्मानित हुए योगेश कुमार साहू को अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार लाने के लिए चुना गया।

उनके कार्यों ने न केवल कई जटिल मामलों को सुलझाने में मदद की, बल्कि राज्य की पुलिस प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा भी दी।
समारोह में भावनात्मक माहौल
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में यह सम्मान समारोह भावनात्मक बन गया।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि —
“पं. लखनलाल मिश्र जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि वर्दी की असली ताकत बंदूक में नहीं, बल्कि न्याय और सत्य के साथ खड़े होने के साहस में होती है।”
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर तालियों की गूंज से इस भावना को सम्मान दिया।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
आज जब अपराध की प्रकृति डिजिटल और जटिल होती जा रही है, तब ऐसे सम्मान नई पीढ़ी के पुलिसकर्मियों को यह संदेश देते हैं कि अनुसंधान की सटीकता और नैतिकता की दृढ़ता दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।

पं. लखनलाल मिश्र सम्मान’ इस दिशा में न केवल प्रोत्साहन का प्रतीक है, बल्कि यह बताता है कि छत्तीसगढ़ की पुलिस परंपरा केवल कानून-पालन की नहीं, बल्कि आदर्श–पालन की परंपरा भी है।
स्व. पं. लखनलाल मिश्र का जीवन यह सिखाता है कि वर्दी तब सबसे अधिक चमकती है, जबउसके भीतर साहस जीवित होता है।
उनकी स्मृति में दिया गया यह सम्मान सिर्फ एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक संदेश है —
कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, न्याय और सच्चाई का मूल्य कभी नहीं बदलता।”एक साहसी वर्दी की विरासत आज भी जिंदा है — हर उस पुलिसकर्मी में, जो सच को अपनी पहचान बनाता है।”
(राजीव खरे चीफ एडिटर)

