सुधा सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा संचालित सुधा ओपन स्कूल, आमा सिवनी में विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) की पूर्व संध्या पर उत्साहपूर्ण एवं आनंदमय समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन रंगमंच की शक्ति, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक एकता के संदेश को समर्पित रहा।
उल्लेखनीय है कि सुधा सोसाइटी फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामुदायिक उत्थान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत एक समर्पित संस्था है। संस्था द्वारा विभिन्न अवसरों पर शैक्षणिक, सामाजिक विकास के साथ साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें देशभक्ति के संदेश के साथ-साथ बच्चों के शैक्षणिक और समग्र विकास क का संदेश भी निहित होता है।

विश्व रंगमंच दिवस की शुरुआत वर्ष 1961 में यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) द्वारा की गई थी, जिसका पहला आयोजन 27 मार्च 1962 को पेरिस में हुआ। इस वर्ष का मुख्य विषय रंगमंच के माध्यम से समाज में संवाद, सहिष्णुता और सांस्कृतिक सहानुभूति को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री ज्योति डेमुडू उपस्थित रहीं। उनके साथ सम्मानित अतिथियों में सुश्री अर्चना शर्मा, सुश्री लता गुप्ता, सुश्री सुनीता गोयल, सुश्री मंजू पालीवाल, सुश्री निर्मला केडिया एवं सुश्री ज्योति उघड़े ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का संचालन संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री जी.के. भटनागर द्वारा किया गया, जिन्होंने पारंपरिक गुलाब जल से अतिथियों का स्वागत कर समारोह का शुभारंभ किया।
विद्यार्थियों ने अपने मनमोहक और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया। परवती यादव, संध्या साहू, महाक यादव, दुर्गेश्वरी साहू, ईशा यादव, पर्मिला यादव और ईशिका बघेल ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किए। विशेष आकर्षण रहा कक्षा 1 की नन्हीं ईशिका चौहान का प्रस्तुतीकरण, जिसमें उन्होंने “दिल चुराया मैंने” गीत पर मोबाइल फोन के सजग उपयोग का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री भारती मरावी एवं मिस खुशी यादव ने कुशलतापूर्वक किया। सभी अतिथियों ने बच्चों को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही बच्चों ने सुश्री ज्योति डेमुडू द्वारा प्रायोजित अल्पाहार का आनंद लिया।कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के सुरों के साथ हुआ, जिसमें गीत और राष्ट्रगान प्रस्तुत किए गए।

अंत में श्री जी.के. भटनागर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “रंगमंच की रचनात्मकता न केवल युवा मन को प्रेरित करती है, बल्कि समाज में व्याप्त भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति भी देती है।”
[ रायपुर ब्यूरो]

