सुधा ओपन स्कूल, अमासिवनी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, आत्मबलिदान और राष्ट्रनिर्माण की भावना को सुदृढ़ करना था।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री एन.एन. आचार्य, पूर्व सतर्कता अधिकारी, रेलवे ने विद्यार्थियों को प्रेरक संबोधन दिया और सर्वश्रेष्ठ स्लोगन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता छात्र:
• सन्ध्या साहू
चांदनी वर्मा
• इशिका बघेल
चयनित सर्वश्रेष्ठ स्लोगन:
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा।”
“आजादी दी नहीं जाती, ली जाती है।”
“सफलता दूर हो सकती है, लेकिन वह मिलती जरूर है।”
कार्यक्रम में श्री जी.के. भटनागर चेयरमैन, सुधा सोसाइटी फाउंडेशन ने विशेष रूप से सहभागिता की और कार्यक्रम का सफल संचालन किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को प्रेरणादायी और भावनात्मक बना दिया।
.मुख्य अतिथि श्री एन.एन. आचार्य का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पौधा भेंट कर किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और सम्मान की भावना का प्रतीक रहा।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: संक्षिप्त जीवन परिचय
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, क्रांतिकारी नेता और अद्वितीय देशभक्त थे। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा (अब ओडिशा) के कटक नगर में हुआ था। वे प्रारंभ से ही मेधावी छात्र थे और भारतीय सिविल सेवा (ICS) जैसी प्रतिष्ठित सेवा को त्यागकर उन्होंने देशसेवा का मार्ग चुना।
नेताजी का विश्वास था कि भारत को स्वतंत्रता केवल याचना से नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान से मिलेगी। इसी विचारधारा के साथ उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) का गठन किया और ऐतिहासिक नारा दिया —
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।”
यह नारा आज भी युवाओं के भीतर देशभक्ति और बलिदान की भावना को जागृत करता है। नेताजी ने “जय हिंद” जैसे ओजस्वी उद्घोष से पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया। उनका जीवन साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की अनुपम मिसाल है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत, नेतृत्व का प्रतीक और आत्मसम्मान की जीवंत प्रतिमा हैं।
निष्कर्ष
सुधा ओपन स्कूल, अमासेओनी द्वारा आयोजित पराक्रम दिवस कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्रप्रेम, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध जगाने का सशक्त माध्यम बना। यह आयोजन नेताजी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायी प्रयास सिद्ध हुआ।
स्थानीय संवाददाता


