रायपुर। नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नया आदेश जारी किया है। इसके तहत अब सफाईकर्मियों को प्रतिदिन पूरे आठ घंटे ड्यूटी करनी होगी। तय समय से कम काम करने पर वेतन नहीं दिया जाएगा। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम शहर में लगातार मिल रही लापरवाही और अधूरी सफाई की शिकायतों को देखते हुए उठाया गया है।
ठेका व्यवस्था खत्म करने की तैयारी
नगरीय निकायों द्वारा लंबे समय से अपनाई जा रही ठेका प्रणाली को भी बंद करने की तैयारी है। अब सफाई व्यवस्था सीधे नगर निगम के अधीन होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ठेकेदारों व अधिकारियों की मिलीभगत से होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
भुगतान में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें
सफाईकर्मियों का सबसे बड़ा दर्द समय पर वेतन न मिलना रहा है। कई बार महीनों तक वेतन अटक जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। कुछ इलाकों में यह भी सामने आया है कि पूरी ड्यूटी करने के बाद भी भुगतान आधा-अधूरा मिलता है। कर्मचारियों का आरोप है कि बिचौलियों और अधिकारियों की मिलीभगत से वेतन में कटौती और हेराफेरी आम हो गई है। वहीं कई बार बिना ड्यूटी किए नाम दर्ज करवा कर फर्जी भुगतान कराने की शिकायतें भी उठी हैं।
लापरवाही से बिगड़ती तस्वीर
शहर के कई वार्डों में साफ-सफाई का हाल यह है कि सड़क किनारे कचरे के ढेर पड़े रहते हैं। कुछ कर्मचारी नियमित समय पर उपस्थित नहीं होते, तो कई इलाके पूरी तरह छूट जाते हैं। नतीजा यह है कि नागरिकों को गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों से जूझना पड़ता है।
सुधार के उपाय और सुझाव
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आठ घंटे ड्यूटी की शर्त से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे—
• बायोमेट्रिक अटेंडेंस: हर कर्मचारी की हाजिरी बायोमेट्रिक मशीन से दर्ज हो ताकि यह स्पष्ट रहे कि किसने कितने घंटे काम किया।
• समय पर वेतन: सैलरी सीधे बैंक खाते में भेजी जाए, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर रोक लगे।
• निगरानी तंत्र: प्रत्येक ज़ोन में स्वतंत्र निरीक्षण टीम हो, जो सफाई कार्य की गुणवत्ता और समयपालन पर नज़र रखे।
• कर्मचारियों का सम्मान: अच्छे काम करने वाले सफाईकर्मियों को पहचान और प्रोत्साहन मिले ताकि उनमें उत्साह और जिम्मेदारी बनी रहे।
नगर निगम का दावा है कि इस नए आदेश से सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और शहरवासियों को बेहतर माहौल मिलेगा। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पहले वेतन और सुविधाओं की गारंटी सुनिश्चित की जाए, तभी आठ घंटे ड्यूटी की शर्त न्यायसंगत होगी।
( राजीव खरे – ब्यूरो चीफ छत्तीसगढ़)

