राजधानी रायपुर रेलवे स्टेशन सोमवार को कुलियों के विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर सैकड़ों कुलियों ने परिवारजनों के साथ धरना दिया और बैटरी चालित गाड़ियों के खिलाफ नारेबाज़ी की।
कुलियों का कहना है कि रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा के नाम पर शुरू की गई बैटरी चालित गाड़ियां उनके रोज़गार पर सीधा हमला हैं। अब तक यात्री अपने भारी सामान को उठाने के लिए कुलियों पर निर्भर रहते थे, लेकिन बैटरी गाड़ियों की शुरुआत ने उनकी आजीविका छीनने का काम किया है।
कुलियों की आपत्ति
प्रदर्शन कर रहे कुलियों ने कहा कि बैटरी गाड़ियां धीरे-धीरे उनके काम को पूरी तरह खत्म कर देंगी। उनका तर्क है कि रेलवे यात्रियों की सुविधा के नाम पर उनका रोजगार समाप्त कर रहा है। विरोध कर रहे कुलियों ने मांग की कि या तो इस सेवा को तुरंत बंद किया जाए या फिर प्रभावित कुलियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
संगठनों का मिला समर्थन
इस आंदोलन को स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिला है। क्रांति सेना और जोहार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पर पहुँचकर कुलियों का साथ दिया और उनकी मांगों का समर्थन किया।
रेलवे का पक्ष
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बैटरी चालित वाहन सेवा यात्रियों, खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वालों के लिए शुरू की गई है। रेलवे ने इसे सुविधा विस्तार की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, कुलियों के विरोध को देखते हुए अधिकारियों ने बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
भविष्य की तस्वीर
फिलहाल कुलियों का आंदोलन जारी है और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर रेलवे का मानना है कि नई तकनीक और यात्रियों की सुविधा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ऐसे में आने वाले दिनों में इस टकराव को सुलझाने के लिए बीच का रास्ता निकालना अनिवार्य होगा।
( राजीव खरे ब्यूरो चीफ छत्तीसगढ़)

