मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से 14 मासूम बच्चों की मौत की घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। इस त्रासदी के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत दवाओं की बिक्री और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने भी राज्यभर में अलर्ट घोषित कर दिया है।
छत्तीसगढ़ का बड़ा कदम
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आदेश दिया है कि अब किसी भी मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना कफ सिरप उपलब्ध नहीं होगा। सभी दुकानदारों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि वे बिना पर्ची दवा बेचते पाए गए, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ’ नामक कफ सिरप पीने से बच्चों की हालत बिगड़ी और कई की मौत हो गई। जिन बच्चों ने यह दवा ली, उनमें से कई को किडनी फेलियर और यूरिन बंद होने जैसी गंभीर समस्याएँ सामने आईं। अस्पतालों में भर्ती बाकी बच्चों की हालत भी नाजुक बताई जा रही है।
केंद्र और राज्यों की सख्ती
• केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देशित किया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप या खांसी-जुकाम की दवाएँ न दी जाएँ।
• पाँच साल से कम उम्र में इन दवाओं का प्रयोग केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाए।
• दवा नियंत्रण अधिकारियों को कहा गया है कि वे तुरंत बाजार से संदिग्ध बैच और दवाओं के सैंपल इकट्ठा कर जांच के लिए भेजें।
जनता को चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को साधारण सर्दी-जुकाम में खुद से दवा देना खतरनाक साबित हो सकता है। अधिकतर मामलों में खाँसी और जुकाम बिना दवा के भी कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को डॉक्टर से सलाह लिए बिना कफ सिरप नहीं देना चाहिए।
आगे की राह
यह घटना देश की दवा नियामक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब राज्यों पर दबाव है कि वे दवाओं की क्वालिटी और वितरण की सख्ती से निगरानी करें। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम दवा दुकानों में मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
( राजीव खरे ब्यूरो चीफ छत्तीसगढ़)

