
“छत्तीसगढ़ में ई-मोबिलिटी को रफ्तार: 1.49 लाख EV पंजीकृत, 290 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन; अब हर जिले तक पहुँचेगी सुविधा”
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उपयोग को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय, महानदी भवन में परिवहन सचिव एस. प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं, विक्रेताओं, पेट्रोल पंप संचालकों और चार्जिंग स्टेशन ऑपरेटरों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था राज्य के सभी हिस्सों में अधिक से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित करना और निजी कंपनियों की भागीदारी से नेटवर्क को मजबूत करना। बैठक में साझा आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक 1.49 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं और 290 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 50% रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में हैं, जबकि अन्य जिलों में चार्जिंग सुविधा सीमित है।
भविष्य की रणनीति
जिन जिलों में चार्जिंग स्टेशन कम हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर नई यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। पेट्रोल पंप और वाणिज्यिक परिसरों में चार्जिंग स्टेशन लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी सब्सिडी और टैक्स छूट भी दी जाएगी। इसके साथ ही, ग्रीन एनर्जी जैसे सौर ऊर्जा से चार्जिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उत्सर्जन और घट सके। वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 12,617 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की जा चुकी है, जो सरकार के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है।
परिवहन सचिव एस. प्रकाश ने कहा — “हमारा लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में हर जिले में पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं हों, ताकि लोग निश्चिंत होकर ई-वाहन का उपयोग कर सकें और छत्तीसगढ़ ई-मोबिलिटी का हब बन सके।”
बैटरी पावर्ड व्हीकल — बचत और फायदे
बैटरी पावर्ड व्हीकल न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी हैं, बल्कि पर्यावरण और तकनीकी दृष्टि से भी पेट्रोलियम वाहनों की तुलना में कहीं बेहतर साबित होते हैं। पेट्रोल की मौजूदा कीमत और वाहनों के औसत माइलेज को देखें तो पेट्रोल वाहन चलाने पर प्रति किलोमीटर लगभग ₹6.5 का खर्च आता है, जबकि EV में यही दूरी मात्र ₹1 से ₹1.5 में तय हो जाती है। इसका सीधा अर्थ है कि 1,000 किमी चलाने पर करीब ₹5,000 की बचत संभव है। रखरखाव के मामले में भी EV आगे हैं—इनमें इंजन ऑयल, फिल्टर या गियरबॉक्स जैसी मेंटेनेंस जरूरतें नहीं होतीं, जिससे खर्च लगभग आधा रह जाता है। उत्सर्जन न होने से यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं, और यदि इन्हें सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से चार्ज किया जाए तो ये लगभग शून्य-उत्सर्जन वाहन बन जाते हैं। तेज पिक-अप, स्मूथ ड्राइव और कम शोर के कारण ड्राइविंग अनुभव बेहतर होता है, साथ ही घर या सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर आसानी से चार्जिंग की सुविधा भी मिलती है। लंबी अवधि में, 5–6 साल में ईंधन और मेंटेनेंस की बचत से EV की शुरुआती लागत की भरपाई हो जाती है, जबकि रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर मिलने वाली छूट इसे और किफायती बनाती है।
( राजीव खरे चीफ एडिटर)
