
सावन की फ्रेंडशिप डे पर मार-मुर्ग़े की जगह आलू और दारू की जगह भोलेनाथ के प्रसाद के सहारे सादगी से मना फ्रेंडशिप डे।
सावन चल रहा है साहब!
एक ओर गंगा-जमुना में आस्था की लहरें बह रही थीं, उधर सोशल मीडिया पर “Happy Friendship Day” की स्टोरी की बाढ़ आई पड़ी थी। लेकिन इस बार मामला बड़ा गड़बड़ा गया —फ्रेंडशिप डे की तारीख सावन से भिड़ गई और भिड़ंत में जो हुआ, वो भोलेनाथ भी देख कर बोले होंगे — “हर हर महादेव… और हर हर बवाल!”
सबसे पहले बात लड़कों की करें तो…
लड़कों ने भोलेनाथ को जल चढ़ाया, फिर वहीं पास की प्रसादी वाली दुकान से समोसे, कचौड़ी, ठंडाई और ‘कुछ ख़ास मिलावट’ के साथ “बाबा स्पेशल नशा” लेकर फ्रेंडशिप डे मनाने बैठ गए। एक बोला, “भाई तू पेमेंट कर”, दूसरा बोला, “दोस्ती में कैसा हिसाब?”
तीसरा बोला, “भाई तूने दो समोसे खाए थे!”
और फिर क्या…?
जहाँ प्रसाद था, वहीं प्रसाद प्रसाद नहीं रहा, बहाना बन गया बहस का।
और फिर —
कचौड़ी के बहाने चांटा, समोसे के बहाने सूपरकिक, और ठंडाई के नाम पर तगड़ी ठुकाई! और लात-घूंसे असली गिफ्ट में मिले
भोलेनाथ मुस्कुरा रहे थे…
“हर साल जल चढ़ाते हैं, इस बार जलवा भी दिखा गए मेरे भक्त!”
अब आते हैं लड़कियों की ओर… क्योंकि सावन में साज-श्रृंगार और आधुनिकता दोनों का मिलाजुला महोत्सव था।
जहाँ पहले सावन में मेंहदी लगती थी, अब ‘जीन्स और टाप में स्वैग’, ‘कंधा झटक स्टाइल’ और ‘कैटवॉक मंदिर के बाहर’ जैसे रीलों का बोलबाला है।
लड़कियाँ बोलीं — “भाई सावन है, शराब नहीं पी सकते…”
लेकिन भोले प्रसाद में जो ठंडी ठंडाई थी, उसमें गरमी ज़रूर थी —
ड्रग्स की चुटकी मिली और स्वैग की पूरी कढ़ाही!
और फिर शुरू हुआ “मॉडर्न फ्रेंडशिप डे” —
छोटे कपड़े, ऊँची आवाज़ें, रेन डांस, बड़ी बातें और बेधड़क कैमरे। तथाकथित दोस्त वीडियो बना रहे थे — ताकि वक्त आने पर “सबूत या ब्लैकमेल”, दोनों काम आ जाए!
और दोस्ती? वो आजकल रील से बनती है और रील से टूटती है।
– एक लड़की ने दूसरी की रील पर लाइक नहीं किया
– दूसरी ने उसके बॉयफ्रेंड की पोस्ट पर दिल भेज दिया
– और फिर मंदिर के बाहर बालों की ऐसी चोटी खींच प्रतियोगिता चली कि भोलेनाथ के त्रिशूल भी शरमा गए।
अब फ्रेंडशिप डे पहले जहाँ चॉकलेट से मीठा होता था,
आज लात-घूंसे, स्टोरी ब्लॉक, और लाइव वायरल की भेंट चढ़ गया।
पर एक अच्छी खबर भी रही इस बार…
सावन के चलते कई मुर्गे शहीद होने से बच गए।
पहले हर फ्रेंडशिप डे पर मुर्गे कुरकुरे बनकर कुरकुरा जीवन त्यागते थे, लेकिन इस बार भोले बाबा के डर से लोग मुर्गा भूल गए और नशे, प्रसाद और इंस्टा स्टोरी में ही मग्न रहे।
निष्कर्ष यही है अब दोस्ती में गिफ्ट नहीं, रील टैगिंग चलती है। मंदिर में भक्ति नहीं, बैकराउंड म्यूजिक बजता है। प्रसाद में आशीर्वाद नहीं, नशे का टशन होता है।
और कपड़े छोटे हों या दिमाग — कैमरा हर जगह ऑन होता है। इस प्रकार कैसे सावन के धार्मिक माहौल में भी लड़के-लड़कियों ने “प्रसाद के बहाने ड्रग्स”, “छोटे कपड़े”, और रेन डांस में “वीडियो शूटिंग” जैसी आधुनिक हरकतें कर डालीं — और सावन में फ्रेंडशिप डे मुर्गे की जगह आलू और दारू की जगह भोलेनाथ का प्रसाद के सहारे सादगीपूर्ण ढंग से पर हर्षोल्लास से मनाया गया।
( राजीव खरे- सावन और फ्रेंडशिप डे की कश्मकश में उलझा एक व्यंग्यकार)

