
छत्तीसगढ़ में ₹500 करोड़ से अधिक का मेडिकल घोटाला: तीन वरिष्ठ IAS अधिकारी ईडी के रडार पर
रायपुर,
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में सामने आए बहुचर्चित ₹500 करोड़ से अधिक के दवा और रीएजेंट खरीदी घोटाले में जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब प्रशासन के शीर्ष स्तर की ओर रुख कर लिया है। ईडी की अगली कार्रवाई की जद में अब तीन वरिष्ठ IAS अधिकारी बताए जा रहे हैं, जिनमें तत्कालीन CGMSC की प्रबंध निदेशक सहित दो अन्य अधिकारी शामिल हैं।
यह घोटाला छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के माध्यम से किया गया, जहां बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं, मशीनें और उपकरण खरीदे गए, जिनकी ज़रूरत ही नहीं थी। कई जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उपकरण भेजे गए, जबकि उनमें से 350 से अधिक केंद्रों में भंडारण की मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं थी।
ईडी की अब तक की कार्रवाई में सात आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें प्रमुख सप्लायर और घोटाले के मुख्य सूत्रधार भी शामिल हैं। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में की गई छापेमारी में कई वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड गड़बड़ियों के सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि पूरे प्रकरण की जड़ें उच्च स्तर तक फैली हैं।
सूत्रों के अनुसार जिन अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी हो रही है, वे उस समय दवा खरीद और सप्लाई प्रक्रिया के निर्णायक पदों पर थे। आरोप है कि इनकी जानकारी और सहमति से ऐसी मशीनें खरीदी गईं जो न केवल अनुपयोगी थीं, बल्कि जिनके रख-रखाव और संचालन के लिए ज़मीनी ढांचा ही मौजूद नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया है कि किसी भी प्रकार का आवश्यकता मूल्यांकन या बेसलाइन सर्वेक्षण किए बिना ही करोड़ों रुपये की खरीददारी कर दी गई। कई निजी सप्लायरों को नियमों को दरकिनार करते हुए भुगतान किए गए और गुणवत्ता से सीधा समझौता किया गया।
ईडी अब इन अधिकारियों को समन जारी करने की प्रक्रिया में है और जेल में बंद सप्लायरों व पूर्व अधिकारियों से पूछताछ के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और प्रभावशाली नामों के सामने आने की प्रबल संभावना है।
प्रशासनिक गलियारों में इस जांच के चलते हलचल और तनाव का माहौल है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के मौजूदा अधिकारियों ने जांच में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया है।
( राजीव खरे- चीफ एडिटर)

