छत्तीसगढ़ की धरती ने हमेशा से प्रतिभा, ऊर्जा और उल्लास का स्वागत किया है। इसी परंपरा को नया आयाम देते हुए विगत दिवस अंबिकापुर में आयोजित एक पार्टी में दिल्ली के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ॰ उमेश खरे एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शीतांशु खरे ने ऐसा जलवा बिखेरा कि दर्शक झूम उठे।
कार्यक्रम के दौरान जब लगभग सत्तर वर्ष के डॉ॰ खरे ने “किस डिस्को में जाएं, मय से मीना से ना साकी से, आजकल तेरे मेरे चर्चे हर ज़बान पर” जैसे सुपरहिट गीतों पर कदम थिरकाए, तो पूरी महफ़िल झूम उठी। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शीतांशु की एनर्जेटिक परफॉर्मेंस ने समा बांध दिया। दर्शकगण ‘वन मोर! वन मोर!’ की गूंज के साथ इस जोड़ी का उत्साहवर्धन करते रहे।

डॉ॰ उमेश खरे, जो कि एनटीपीसी से मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, हमेशा से अपने हंसमुख स्वभाव और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी ऊर्जा, जोश और जीवन का आनंद लेने की भावना देखते ही बनती है। वे मानो यह संदेश दे रहे थे कि “उम्र कैलेंडर का एक पन्ना मात्र है, जिंदादिली ही असली जवानी है।”
अंबिकापुर के दर्शकों ने न केवल उनकी धमाकेदार डांस परफॉर्मेंस का आनंद लिया, बल्कि उनसे यह प्रेरणा भी पाई कि जीने का जज़्बा हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
डॉ॰ उमेश खरे और श्रीमती शीतांशु की प्रस्तुति यह साबित करती है कि कला और उमंग की कोई आयु नहीं होती। यह जोड़ी न सिर्फ दिल्ली के, बल्कि पूरे देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत है — जो यह सिखाती है कि जीवन की दूसरी पारी भी उतनी ही रंगीन, उत्साही और सार्थक हो सकती है, बस मन में जोश होना चाहिए।
अंबिकापुर की यह शाम एक संदेश दे गई — जिंदगी अगर मुस्कुराकर जी ली जाए, तो हर मंच, हर उम्र, हर पल उत्सव बन जाता है।”
( सरगुजा ब्यूरो)

