कैसी विडंबना है कि जिस दवा को जीवन बचाने के लिए तैयार किया जाता है, वही दवा बच्चों की अकाल मृत्यु का कारण बन जाए। हाल ही में खांसी की साधारण दवा के सेवन के बाद कई मासूमों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी दवा निर्माण और निगरानी व्यवस्था की भयावह सच्चाई को सामने लाने वाला त्रासद दृश्य है।
हमारा समाज यह मानकर चलता है कि अस्पताल और डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, वह सुरक्षित होगी। लेकिन जब वही दवा ज़हर का काम करने लगे, तो जिम्मेदारी किसकी है? निर्माता कंपनियों की जो लागत घटाने के लिए घटिया रसायन इस्तेमाल करती हैं, या फिर उन निगरानी संस्थाओं की जिनकी सुस्ती और उदासीनता ऐसे हादसों का रास्ता खोल देती है?
सच्चाई यह है कि दवा निर्माण क्षेत्र में लंबे समय से गुणवत्ता मानकों की अनदेखी होती रही है। छोटी फार्मा इकाइयाँ बिना पर्याप्त जाँच के बाज़ार में दवाएँ उतार देती हैं और नियामक संस्थाएँ कागज़ों पर मुहर लगाने से आगे नहीं बढ़ पातीं। यह न केवल जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि पूरे देश की साख पर प्रश्नचिह्न है।
इन घटनाओं ने यह भी दिखा दिया है कि ‘मुफ़्त दवा योजनाएँ’ तभी सार्थक होंगी जब दवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी हो। अन्यथा गरीब परिवारों को राहत देने के बजाय यह योजनाएँ उनके बच्चों की असमय मौत का कारण बन सकती हैं। दवा की गुणवत्ता में ज़रा-सी चूक साधारण उपचार को जानलेवा बना देती है, और यही सबसे डरावनी हकीकत है।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक हम ऐसी त्रासदियों के बाद ही जागते रहेंगे? बार-बार बच्चों की मौतें होती हैं, मुआवज़े की घोषणाएँ होती हैं, दोषियों की गिरफ्तारी होती है, फिर समय बीतते ही सबकुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन उन परिवारों के लिए जिनके मासूम हमेशा के लिए खो गए, यह कोई सांत्वना नहीं है।
यह समय है कि सरकार और नियामक तंत्र दिखावे की बजाय ठोस सुधार करें। हर दवा निर्माण इकाई को आधुनिक मानकों पर अपग्रेड करना अनिवार्य हो। हर बैच की स्वतंत्र प्रयोगशाला में जाँच हो। दोषी निर्माताओं को कठोर दंड मिले और उनके कारोबार पर स्थायी रोक लगे। केवल तभी जनता को यह भरोसा दिलाया जा सकेगा कि उनकी दवा वाकई जीवन रक्षक है, न कि मृत्यु का निमंत्रण।
आज जो मासूम काल के ग्रास बने, उनकी बलि व्यर्थ न जाने दी जाए। यह हादसा एक सबक बने—क्योंकि दवा में लापरवाही, किसी भी सूरत में, क्षम्य नहीं हो सकती।
( राजीव खरे चीफ ब्यूरो छत्तीसगढ़)

