भारतीय प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत परिषद के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव बने गणेश वैष्णव•
“जन की आवाज़ – शासन तक पहुँचाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य”

भारतीय प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत परिषद ने छत्तीसगढ़ में संगठन का विस्तार करते हुए समाजसेवी गणेश वैष्णव को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया है। परिषद की राष्ट्रीय इकाई ने यह जिम्मेदारी सौंपते हुए भरोसा जताया है कि वे संगठन के उद्देश्यों को प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचाएँगे और जनता की शिकायतों के समाधान को जन आंदोलन का स्वरूप देंगे।

गणेश वैष्णव ने नियुक्ति के बाद कहा—
“यह मेरे लिए सम्मान के साथ कर्तव्य भी है। मैं पूरी निष्ठा से काम करूँगा ताकि समाज का वह अंतिम व्यक्ति, जिसे न्याय नहीं मिल पा रहा, उसे सही मंच पर सुना जा सके। प्रशासनिक सुधार और शिकायत निवारण केवल व्यवस्था की मजबूती के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के आत्मविश्वास के लिए भी आवश्यक हैं।”
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज भी आम नागरिक छोटी-छोटी शिकायतों, भ्रष्टाचार और लापरवाही से जूझ रहा है। राजस्व, पुलिस, नगर निगम या पेंशन जैसी समस्याओं के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। जब शिकायतें समय पर नहीं सुनी जातीं, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होती हैं। गणेश वैष्णव ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य ऐसी प्रणाली खड़ी करना है जहाँ शिकायत न केवल दर्ज हो, बल्कि उसका समयबद्ध और पारदर्शी निवारण भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा—
“छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ बड़ी आबादी ग्रामीण और आदिवासी है, शिकायत निवारण व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसान की फ़सल बीमा राशि महीनों तक अटकी रहे, श्रमिक को उसका हक न मिले या वृद्धा पेंशन के लिए भटके, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की हार है। इसलिए सुधार और निवारण व्यवस्था समाजिक न्याय और मानवाधिकार का भी प्रश्न है।”
विज़न डॉक्यूमेंट और 10 बिंदुओं की कार्ययोजना
गणेश वैष्णव ने अपने विज़न डॉक्यूमेंट के साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए 10 बिंदुओं की कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिनका सार इस प्रकार है—
1. जिला एवं ब्लॉक स्तर पर संगठन विस्तार – हर जिले और ब्लॉक में परिषद की टीम गठित कर ग्रामीण से शहरी स्तर तक शिकायतें दर्ज करने की व्यवस्था।
2. शिकायत निवारण हेल्पलाइन – टोल-फ्री नंबर और ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर नागरिकों को घर बैठे शिकायत दर्ज करने की सुविधा।
3. समयबद्ध समाधान – अधिकारियों से तालमेल कर शिकायतों के निपटारे की निगरानी और लंबित मामलों को सार्वजनिक करना।
4. जन जागरूकता अभियान – गाँव-गाँव व मोहल्लों में शिविर लगाकर जनता को शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया समझाना।
5. भ्रष्टाचार पर निगरानी – भ्रष्टाचार व लापरवाही संबंधी शिकायतों को गंभीरता से उठाकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्ट भेजना।
6. युवाओं व स्वयंसेवकों की भागीदारी – छात्रों व युवाओं को संगठन से जोड़कर पारदर्शिता और ईमानदारी का संदेश फैलाना।
7. शोध और संवाद – विशेषज्ञों, पत्रकारों और समाजसेवियों के साथ कार्यशालाएँ आयोजित कर सुझाव सरकार तक पहुँचाना।
8. आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान – पिछड़े इलाकों में विशेष टीम भेजकर सीधे शिकायत दर्ज करना।
9. डिजिटल पारदर्शिता – शिकायतों और उनके निवारण की स्थिति ऑनलाइन सार्वजनिक कर जनता को निगरानी का अधिकार देना।
10. “जन की आवाज़ – शासन तक” अभियान – हर तीन महीने में सम्मेलन आयोजित कर शिकायतों का संकलन सरकार को सौंपना।

भारतीय प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत परिषद की छत्तीसगढ़ इकाई में गणेश वैष्णव की नियुक्ति केवल संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि प्रदेश में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में नई उम्मीद है। यदि यह कार्ययोजना ईमानदारी और निरंतरता से लागू होती है, तो निश्चित ही छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत निवारण के क्षेत्र में एक आदर्श बन सकता है।

गणेश वैष्णव ने समापन में कहा— “यह पद मेरे लिए समाज की सेवा का अवसर है। मेरा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ में कोई भी नागरिक न्याय के लिए दर-दर न भटके। जनता की आवाज़ को शासन तक पहुँचाना ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।”
(राजीव खरे, चीफ एडिटर)
