राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में बवाल मचा दिया है। सोमवार सुबह जब लोगों ने देखा कि छत्तीसगढ़ की पहचान मानी जाने वाली महतारी की मूर्ति जमीन पर टूटी पड़ी है, तो आक्रोश फूट पड़ा। स्थानीय नागरिकों, सांस्कृतिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे प्रदेश की अस्मिता पर हमला बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी कथित रूप से मानसिक रूप से अस्वस्थ है, परंतु जनता इसे सामान्य अपराध नहीं मान रही। लोगों का कहना है कि “यह किसी की व्यक्तिगत मानसिकता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता को ठेस पहुंचाने की साजिश है।”
घटना के कुछ ही घंटे बाद सरकार ने नई प्रतिमा पुनः स्थापित कर दी, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। इसी बीच जोहार छत्तीसगढ़पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने एक बयान देकर विवाद को और हवा दे दी।
अमित बघेल का विवादित बयान
अमित बघेल ने प्रेस से बातचीत में कहा कि “अगर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ी जा सकती है तो बाकी समाजों के प्रतीकों को भी उतना ही सम्मान या सवाल झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने महाराजा अग्रसेन और भगवान झूलेलाल जैसे पूजनीय व्यक्तित्वों पर भी टिप्पणी कर दी, जिससे सिंधी और अग्रवाल समाज में गहरा रोष फैल गया।
उनके बयान को सोशल मीडिया पर ‘भड़काऊ’ और ‘सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाला’ बताया जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में सिंधी महासभा और अग्रवाल समाज के लोगों ने सामूहिक विरोध प्रदर्शन करते हुए अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग की है।
समाजों का आक्रोश और प्रशासन की चिंता
सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि “हमारे आराध्य भगवान झूलेलाल पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी सहन नहीं की जाएगी। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो हम शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।”

अग्रवाल समाज की ओर से भी कड़ा बयान आया — “महाराजा अग्रसेन वाणी और व्यापार दोनों के प्रतीक हैं। उन पर अभद्र टिप्पणी पूरे व्यवसायिक समाज का अपमान है।”
प्रशासनिक स्तर पर पुलिस ने अमित बघेल के बयान का वीडियो संज्ञान में लिया है। सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं को देखते हुए रायपुर पुलिस ने शांति समिति की बैठक बुलाई है और सभी समुदायों से संयम बरतने की अपील की है।
राजनीतिक रंग और सामाजिक समीकरण
घटना ने धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सत्तारूढ़ दल इस घटना को “प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर हमला” बता रहा है, जबकि विपक्ष ने सरकार पर “सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा में असफलता” का आरोप लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना सिर्फ प्रतिमा-वैंडलिज़्म नहीं, बल्कि पहचान-राजनीति का नया दौर शुरू करने की कोशिश है — जहां क्षेत्रीय अस्मिता बनाम धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों की बहस छिड़ गई है।
समाज में तनाव, लेकिन उम्मीद भी
हालांकि छत्तीसगढ़ के कई सांस्कृतिक संगठनों ने संयम की अपील की है। “छत्तीसगढ़ महतारी” और “महाराजा अग्रसेन” दोनों ही मातृ-संस्कृति और लोक-व्यवस्था के प्रतीक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय जरूरत “प्रतिमाओं की राजनीति” नहीं, बल्कि समाज के भीतर संवाद को पुनः स्थापित करने की है।
छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति-तोड़क घटना ने यह साबित कर दिया कि प्रतीक केवल पत्थर या मूर्तियां नहीं, बल्कि भावनाएं हैं। जब कोई उन पर चोट करता है — चाहे वह हथौड़े से हो या शब्दों से — तो समाज सुलग उठता है।
अमित बघेल का बयान इस आग में घी डालने जैसा साबित हुआ है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन न्याय के साथ-साथ सामाजिक समरसता को कितनी तत्परता से बहाल करता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ महतारी केवल एक मूर्ति नहीं — छत्तीसगढ़ की आत्मा है।
( राजीव खरे – चीफ ब्यूरो छत्तीसगढ़)

